जिंदा रहने और एक हेल्दी लाइफ जीने के लिए दिल का सिर्फ धड़कना ही काफी नहीं है, बल्कि सही स्पीड में धड़कना भी जरूरी है. एब्नार्मल हार्ट बीट इमरजेंसी कंडीशन के साथ जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसे मेडिकल भाषा में अर्थेमिया भी कहते हैं. जब हार्ट बीट बहुत स्लो होती है, तब पेसमेकर का इस्तेमाल किया जाता है. इसे सर्जरी के जरिए लेफ्ट साइड के कॉलरबोन के पास लगाया जाता है, जिसमें 1-2 घंटे का समय लगता है.
लेकिन मेडिकल साइंटिस्ट ने पेसमेकर और इसे लगाने के तरीके को और भी आसान बना दिया है. जल्दी ही आने वाले समय में पेसमेकर चावल के दाने से भी छोटे साइज में उपलब्ध होगा. हालांकि नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसे नवजात बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया है, लेकिन इसका इस्तेमाल हर उम्र का मरीज कर सकेगा.
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दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर
दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर जो चावल के एक दाने से भी छोटा है, को टेंपरेरी कंडीशन के लिए बनाया गया है. नॉर्थवेस्टर्न ने यह भी बताया कि पेसमेकर शरीर के तरल पदार्थों से चार्ज होता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि यह डिवाइस एक पहनने योग्य डिवाइस के साथ जोड़ी जाती है जो अनियमित दिल की धड़कन का पता लगाती है. जिसके बाद इसमें एक लाइट जलती है और पेसमेकर एक्टिव हो जाता है.
नवजात शिशु के लिए किया गया डिजाइन
नॉर्थवेस्टर्न के हार्ट डिजीज स्पेशलिस्ट इगोर एफिमोवा, जिन्होंने दुनिया के सबसे छोटे पेसमेकर को बनाने में सहयोग किया बताते हैं कि लगभग 1% बच्चे जन्मजात हार्ट डिफेक्ट के साथ पैदा होते हैं. इन बच्चों को सर्जरी के बाद केवल अस्थायी पेसिंग की आवश्यकता होती है. लगभग सात दिनों में, अधिकांश रोगियों के दिल खुद ही ठीक हो जाएंगे. लेकिन वे सात दिन बिल्कुल सीरियस हो सकते हैं. ऐसे में ये छोटा पेसमेकर बहुत कारगर साबित होता है.
इंप्लांट करना आसान
अभी पेसमेकर को लगाने के लिए सर्जरी की जाती है. लेकिन इस पेसमेकर को बॉडी के अंदर फिट करने के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं है. इसे एक सिरिंज की मदद से इंप्लांट किया जा सकता है. इसकी एक और खासियत यह है कि जरूरत खत्म होने पर ये पेसमेकर अपने आप बॉडी में घूल जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)