ब्लड प्रेशर का 130/80 mm Hg होना हाइपरटेंशन कहलाता है. यह एक सामान्य पर गंभीर स्थिति है जो शरीर की धमनियों को प्रभावित करती है. इस कंडीशन में हार्ट ब्लड पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है. जिसके कारण दिल और किडनी कमजोर पड़ने लगता है. लेकिन इसका असर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है.
डॉ. धीरज गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार-नेत्र विज्ञान, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल, गुरुग्राम बताते हैं कि हाई ब्लड आपकी आंखों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे कई स्थितियां पैदा हो सकती हैं. इसमें कम दिखने से लेकर पूरी तरह से दिखाई ना दे पाना शामिल है. मुख्य रूप से हाई बीपी के कारण आंखों की ये 5 तरह की बीमारियां हो सकती हैं.
हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी
हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी तब होती है जब हाई ब्लड प्रेशर रेटिना (आंखों के अंदर की पिछली परत) के खून की नसों को डैमेज कर देता है. इसमें मरीज को तब तक कोई लक्षण का नहीं दिखते हैं जब तक देखने में परेशानी ना होने लगे.
कोरॉइडोपैथी
कोरॉइडोपैथी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हाई ब्लड प्रेशर रेटिना के नीचे तरल पदार्थ के जमाव का कारण बनता है. इसमें मरीज को चीजे सीधी नजर नहीं आती है, साथ ही धुंधली दृष्टि के साथ चीजे छोटी या दूर नजर आ सकती हैं.
ऑप्टिक न्यूरोपैथी
ऑप्टिक न्यूरोपैथी में हाई ब्लड प्रेशर के कारण ऑप्टिक तंत्रिका जो ब्रेन को इमेज सिग्नल भेजती है, डैमेज होने लगती है. जिसके कारण देखने में परेशानी या परमानेंट आंखों की रोशनी जा सकती है.
रेटिनल आर्टरी ऑकल्यूजन
इसमें हाई ब्लड प्रेशर से आंखों की रेटिना में ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट होने लगती है. इसमें मरीज को अचानक एक आंख से दिखना बंद हो सकता है.
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ग्लूकोमा
हाई ब्लड प्रेशर आंख के अंदर के दबाव (इंट्राऑकुलर प्रेशर) को बढ़ाने में योगदान कर सकता है, जो ग्लूकोमा के लिए एक जोखिम कारक है. इसमें धीरे-धीरे दिखना कम होने लगता है. यदि तुरंत इलाज ना मिले तो हमेशा के लिए भी दृष्टि जा सकती है.
ऐसे पहचानें हाई बीपी पहुंचा रहा आंखों को नुकसान
धुंधली दृष्टिदोहरी दृष्टिदृष्टि का अचानक नुकसानसिरदर्दआंखों में दर्द
रोकथाम के उपाय और प्रबंधन
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर को मॉनिटर करें. नॉर्मल से कम या ज्यादा होने पर संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन के साथ स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखें. धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन सीमित करें. इसके साथ ही हाइपरटेंशन से होने वाली आंखों की बीमारी के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं
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