do not eat dairy items in PCOS doctor said the problem may increase | दूध, दही, बटर… PCOS में खा रहे डेयरी आइटम्स, डॉक्टर ने बताया बढ़ सकती है प्रॉब्लम

admin

do not eat dairy items in PCOS doctor said the problem may increase | दूध, दही, बटर... PCOS में खा रहे डेयरी आइटम्स, डॉक्टर ने बताया बढ़ सकती है प्रॉब्लम



पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी (PCOS) एक हार्मोनल विकार है जो कई महिलाओं को प्रभावित करता है, जिससे अनियमित माहवारी, वजन बढ़ना, मुंहासे और अनचाहे बालों का उगना जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं.   
हालांकि पीसीओएस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन खानपान में जरूरी बदलाव और दवाओं से इसे मैनेज किया जा सकता है. ऐसे में पीसीओएस होने पर डेयरी आइटम्स के सेवन से बचना जरूरी है. हालांकि दूध, पनीर और दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स आमतौर पर कैल्शियम और प्रोटीन के अच्छे स्रोत के रूप में जाना जाता है, लेकिन PCOS से प्रभावित महिलाओं के लिए यह नुकसानदायक हो सकते हैं. 
इसे भी पढ़ें- चिया सीड्स के फायदे चाहिए, तो खाते वक्त इन 5 गलतियों से बचें
 
PCOS और डेयरी उत्पादों का प्रभाव
डॉ. किजल अवधूत कोठारी, एसोसिएट कंसल्टेंट – ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल, गोवा ने एक मीडिया साइट को बताया कि  दूध, पनीर और दही जैसे डेयरी उत्पादों में मौजूद हार्मोन, खासकर इंसुलिन-लाइक ग्रोथ फैक्टर (IGF-1), इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ा सकता है. इससे PCOS के लक्षण गंभीर हो सकते हैं. 
स्टडी का भी दावा
2024 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, डेयरी का सेवन कम करने से PCOS वाली महिलाओं की सेहत में सुधार होता है. इनमें वजन, बॉडी मास इंडेक्स, कमर का घेराव, फास्टिंग इंसुलिन स्तर और कुल टेस्टोस्टेरोन स्तर में कमी शामिल हैं. ये बदलाव चेहरे के अतिरिक्त बालों और सिर के बालों के पतले होने जैसे लक्षणों को कम कर सकते हैं.
हार्मोनल असंतुलन और डेयरी
डेयरी प्रोडक्ट में नेचुरल रूप से मौजूद हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं. एक्सपर्ट बताती हैं कि फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट में सैचुरेटेड फैट अधिक होता है, जो शरीर में सूजन का कारण बनती है. 
PCOS में मुंहासे और डेयरी
PCOS में डेयरी का सेवन मुंहासे को बढ़ा सकता है, क्योंकि यह इंसुलिन और एंड्रोजेन्स को प्रभावित करता है. 2018 के एक स्टडी में पाया गया कि दूध, दही और पनीर के सेवन से 7-30 वर्ष आयु वर्ग में मुंहासे होने की संभावना बढ़ सकती है. 
इसे भी पढ़ें- ढलती उम्र के असर को स्लो कर सकती है ये विटामिन, स्टडी में मिला जवां रहने का नेचुरल तरीका

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)



Source link