कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथेरेपी एक प्रभावी उपचार मानी जाती है, लेकिन एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि रेडियोथेरेपी के बाद भी शरीर में छोटे कैंसर सेल्स बच सकती हैं, जो स्कैन में दिखाई नहीं देतीं. ये सेल्स भविष्य में दोबारा कैंसर को जन्म दे सकती हैं और मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस बात का खुलासा किया है.
रिसर्च के मुताबिक, रेडियोथेरेपी के बाद किए गए स्कैन में अक्सर यह दिखता है कि ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया है. लेकिन महीनों या वर्षों बाद जब बायोप्सी (ऊतक परीक्षण) की जाती है, तो उसमें बची हुई कैंसर कोशिकाएं पाई जाती हैं, जो स्कैन में पकड़ में नहीं आतीं. वैज्ञानिकों का मानना है कि सिर्फ स्कैन के नतीजों पर भरोसा करना सही नहीं है. इलाज के बाद मरीजों की स्थिति की सघन निगरानी और अतिरिक्त जांच बेहद जरूरी है, ताकि कैंसर के दोबारा पनपने का खतरा कम हो सके.
क्यों घातक हो सकता है अधूरा उपचार?शोधकर्ताओं के मुताबिक, रेडियोथेरेपी की एक खास तकनीक स्टिरियोटैक्टिक एब्लेटिव रेडियोथेरेपी (SABR) का इस्तेमाल अक्सर फेफड़ों, लिवर, प्रोस्टेट और अन्य अंगों के कैंसर के इलाज में किया जाता है. यह तकनीक बहुत सटीक तरीके से रेडिएशन पहुंचाती है और स्कैन में अच्छे परिणाम दिखाती है. लेकिन स्कैन पर पूरी तरह भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि फेफड़ों के कैंसर में 40%, किडनी के कैंसर में 57-69%, प्रोस्टेट कैंसर में 7.7-47.6% और लिवर कैंसर में 0-86.7% मामलों में टिशू जांच में कैंसर सेल्स पाई गईं, जबकि स्कैन में कुछ नजर नहीं आया.
कैंसर के दोबारा लौटने का बड़ा खतराशोधकर्ताओं का कहना है कि जब शरीर में छोटे कैंसर सेल्स बची रह जाती हैं, तो यह भविष्य में कैंसर के दोबारा लौटने का खतरा बढ़ा देती हैं. कैंसर सिर्फ उसी अंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है. खासकर रेक्टल (मलाशय), सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा), प्रोस्टेट और लिवर कैंसर में यह खतरा अधिक देखा गया है.
कैसे हो सकता है बचाव?एक्सपर्ट्स का मानना है कि कैंसर मरीजों को इलाज के बाद सिर्फ स्कैन पर भरोसा नहीं करना चाहिए. नियमित रूप से: बायोप्सी और टिशू टेस्ट कराना जरूरी है. वहीं, शरीर में कहीं भी सूजन, गांठ या असामान्य लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच करवानी चाहिए. इसके अलावा, इलाज के बाद भी लंबे समय तक निगरानी जरूरी है, ताकि छुपी हुई कैंसर सेल्स का समय रहते पता लगाया जा सके.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.