A huge crowd of devotees gathered to have darshan of Thakur Goda Rangamannar Bhagwan seated in a huge chariot made of sandalwood which is 275 years old

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A huge crowd of devotees gathered to have darshan of Thakur Goda Rangamannar Bhagwan seated in a huge chariot made of sandalwood which is 275 years old

Last Updated:March 24, 2025, 13:19 ISTवृंदावन के श्री रंग मंदिर में पौने दो सौ वर्ष पुरानी परंपरा के तहत भगवान गोदा रंगमन्नार की भव्य रथ यात्रा निकली. हजारों भक्तों ने वैदिक विधि अनुसार पूजा कर उत्साहपूर्वक विशाल रथ को खींचा.X

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निर्मल कुमार राजपूत /मथुरा- वृंदावन स्थित उत्तर भारत के सबसे विशाल दक्षिणात्य शैली के श्री रंग मंदिर में चैत्र कृष्ण पक्ष नवमी के अवसर पर ऐतिहासिक रथ यात्रा का आयोजन किया गया. पौने दो सौ वर्ष पुराने चंदन निर्मित भव्य रथ में विराजित ठाकुर गोदा रंगमन्नार भगवान के दर्शन हेतु भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा.

60 फीट ऊंचे भव्य रथ को खींचने की लगी होड़करीब साठ फीट ऊंचे और आकर्षक रूप से सजे रथ को खींचने के लिए भक्तों में उत्साह और होड़ देखने लायक थी. रथ यात्रा के दौरान भगवान के जयकारों से सम्पूर्ण क्षेत्र गुंजायमान हो उठा.

वैदिक विधि से पूजन और रथ यात्रा का शुभारंभब्रह्म मुहूर्त में वैदिक परंपरानुसार ठाकुर रंगनाथ भगवान, श्री देवी और भू देवी के साथ निज गर्भगृह से पालकी में विराजमान होकर मेष लग्न में रथ पर आसीन हुए. मंदिर के पुरोहित विजय किशोर मिश्र और गोविंद किशोर मिश्र ने वेद मंत्रों के साथ पूजन व वंदन किया.

कूपे धमाके के साथ हुआ रथ यात्रा का आरंभलगभग एक घंटे की पूजा के बाद सात कूपे का धमाका और काली के स्वर ने रथ चलने का संकेत दिया. इसके साथ ही भक्तों में उत्साह दोगुना हो गया और विशाल रथ को खींचने की होड़ मच गई.

रथ यात्रा का पड़ाव और श्रद्धालुओं का उत्साहमध्यान्ह में रथ बड़ा बगीचा पहुंचा, जहां विश्राम के बाद रथ पुनः मंदिर की ओर रवाना हुआ. ठाकुर जी को पालकी में विराजित कर शुक्रवार बगीची में ठहराया गया और वहां रंगीन फव्वारों के साथ उन्हें शीतलता प्रदान की गई.

वृंदावन की गलियां जयकारों से गूंजींदेश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालु भगवान रंगनाथ के रथ को खींचकर अपने आप को धन्य मानते नजर आए. वृंदावन की गलियों में भजन-कीर्तन करते हुए भक्त भगवान के रथ को खींचते रहे.

परंपरा और सौभाग्य का अद्भुत संगममंदिर के पदाधिकारी ने लोकल 18 को बताया कि ब्रह्मोत्सव की यह परंपरा अनूठी है, जिसमें विधिपूर्वक भगवान का पूजन कर नगर भ्रमण के लिए रथ यात्रा निकाली जाती है. भक्त भगवान के रथ की रस्सी पकड़कर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं.
Location :Mathura,Uttar PradeshFirst Published :March 24, 2025, 13:19 ISThomeuttar-pradeshवृंदावन की गलियों में बही भक्ति की बयार, भक्तों ने खींचा भगवान का 200 साल पुरा

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