मुंबई में मंगलवार को दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र एक आंख पर बैंडेज के साथ मीडिया के सामने आए. एक आंख की सर्जरी के बाद का उनका एक वीडियो एक पैपराजो द्वारा शेयर किया गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
इस क्लिप में 89 वर्षीय धर्मेंद्र ने अपनी आई सर्जरी को लेकर कहा, अभी भी बहुत दम है, बहुत जान रखता हूं. मेरी आंख में ग्राफ्ट हुआ है. आप दर्शकों से प्यार करता हूं, मेरे दोस्तों, मेरे प्रशंसकों से प्यार करता हूं. मैं मजबूत हूं.
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क्या है आई ग्राफ्टिंग
एनएचएस के अनुसार, यह कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए किया जाने वाला एक ऑपरेशन है. इसमें डैमेज हुई कॉर्निया के सभी या कुछ भाग को निकालकर उसकी जगह पर हेल्दी डोनर टिश्यू को लगाया जाता है. इसे आमतौर पर केराटोप्लास्टी या कॉर्नियल ग्राफ्ट के रूप में भी जाना जाता है.
कब होती है जरूरत?
आई ग्राफ्टिंग का उपयोग नजर में सुधार, दर्द से राहत और सीरियस इंफेक्शन या डैमेज के इलाज करने के लिए किया जा सकता है.
कैसे होती है आई ग्राफ्टिंग
आई ग्राफ्टिंग के लिए सर्जन डैमेज कॉर्निया का एक गोलाकार टुकड़ा निकालता है और उसे डोनर कॉर्निया से समान आकार के टुकड़े से बदल देता है. फिर डोनर कॉर्निया को बहुत बारीक टांकों के साथ सिल दिया जाता है, जिन्हें आमतौर पर 1-2 साल बाद हटा दिया जाता है.
रिकवरी टाइम
आई ग्राफ्टिंग के बाद आंख को पूरी तरह से ठीक होने और दृष्टि को स्थिर होने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है. इस दौरान आई ड्रॉप डालने के लिए भी दिया जाता है, ताकी डोनर टिश्यू अच्छी तरह से एडजस्ट हो सके.
आई ग्राफ्टिंग का खर्च
इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत में आई ग्राफ्टिंग का खर्च 90 हजार से 1 लाख तक हो सकता है. यह राशि प्रति आंख होती है. शहर और हॉस्पिटल के आधार पर यह खर्च कम और ज्यादा भी हो सकता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. इसे अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें. ZEE NEWS इसकी पुष्टि नहीं करता है.)