स्किन कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो समय पर पहचान और सावधानी न बरतने पर जानलेवा साबित हो सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं भी स्किन कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं? जी हां, रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि हमारी रोजमर्रा की कुछ पॉपुलर दवाएं लंबे समय तक लेने से त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं और स्किन कैंसर का कारण बन सकती हैं.
धूप से बचाव और हेल्दी स्किन के लिए हम जितनी सावधानियां बरतते हैं, उतनी ही सतर्कता दवाओं के सेवन में भी जरूरी है. कई बार बिना जानकारी के हम ऐसी दवाएं ले रहे होते हैं, जो हमारी त्वचा को सूरज की किरणों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव बना देती हैं, जिससे स्किन सेल्स को नुकसान पहुंचता है. आइए जानते हैं वे कौन-सी 4 पॉपुलर दवाएं हैं, जिनके लंबे समय तक इस्तेमाल से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
1. एंटीबायोटिक्सएंटीबायोटिक्स का मुख्य काम बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण को खत्म करना है. लेकिन कुछ एंटीबायोटिक्स शरीर की फोटोसेंसिटिविटी (सूरज की रोशनी के प्रति सेंसिटिव) को बढ़ा देती हैं. इससे त्वचा पर धूप की वजह से जलन, रैशेज और त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान होता है. बार-बार ऐसा होने से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.
2. ड्यूरेटिक्स (पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं)ड्यूरेटिक्स का इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर और सूजन जैसी समस्याओं के इलाज में होता है. लेकिन ये दवाएं भी सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के प्रति त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ा देती हैं. लगातार इनका सेवन करने से त्वचा पर सनबर्न होता है, जिससे त्वचा कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
3. इम्यूनोसप्रेसेंट्सइम्यूनोसप्रेसेंट्स दवाएं आमतौर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद दी जाती हैं ताकि शरीर नए अंग को अस्वीकार न करे. ये दवाएं इम्यून सिस्टम को दबा देती हैं, जिससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. इससे स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि कमजोर इम्यून सिस्टम कैंसर सेल्स की वृद्धि को रोक नहीं पाता.
4. NSAIDs (पेन किलर दवाएं)पेन किलर के रूप में इस्तेमाल होने वाली ये दवाएं दर्द और सूजन से राहत देती हैं. लेकिन लंबे समय तक NSAIDs का इस्तेमाल करने से त्वचा को सूरज की रोशनी से नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है. अध्ययनों में पाया गया है कि इन दवाओं का अधिक सेवन करने वाले लोगों में स्किन कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है.