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लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आगामी 14 सितंबर को अलीगढ़ (Aligarh) में राजा महेंद्र प्रताप सिंह (Raja Mahendra Pratap Singh) विश्वविद्यालय की आधारशिला रखेंगेे. राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम का विशेष महत्व है, क्योंकि वह जाट समुदाय से थे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाकों में ही किसान आंदोलन जोर पकड़ रहा है.
जाट नेता और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने News18 को बताया, “यह एक पुराना प्रोजेक्ट रहा है और हम इस फैसले का स्वागत करते हैं. राजा महेंद्र सिंह ने एएमयू के लिए जमीन दी थी और उन्हें भी भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए. वह एक स्वतंत्रता सेनानी थे और भारतीय समाज में उनका योगदान किसी से छिपा नहीं है. खासकर मथुरा में लोगों के मन में उनके प्रति काफी सम्मान और आस्था है. राजा महेंद्र प्रताप सिंह की विरासत को आगे लाने की जरूरत है.” चौधरी ने सिंह को भारत रत्न देने का भी आह्वान किया है.
सिंह 1895 में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज के छात्र बने थे, जिसे बाद में 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का नाम दिया गया. कहा जाता है कि उन्होंने 1929 में एएमयू को तिकोनिया पार्क नामक एक भूखंड पट्टे पर दिया था. इसलिए आरएसएस और भाजपा नेताओं ने 2019 में मांग की थी कि इस विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखा जाए और विश्वविद्यालय उनकी जयंती मनाएं. इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 सितंबर, 2019 को एक राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित करने और उसका नाम राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर रखने की घोषणा की.
राजा महेंद्र प्रताप सिंह से चुनाव हारे थे अटल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां उनके नाम पर विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने जा रहे हैं, वहीं सिंह ने चुनाव में भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने 1957 के लोकसभा चुनाव में मथुरा निर्वाचन क्षेत्र से अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था. सिंह यहां निर्दलीय उम्मीदवार थे, वहीं वाजपेयी भारतीय जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़े थे.
जिन्ना को सांप बताकर गांधी जी को किया था सचेत
स्वतंत्रता संग्राम में सिंह का योगदान महत्वपूर्ण था. उन्हें 1915 में अफगानिस्तान में निर्वासन में रहते हुए भारत की अंतरिम सरकार बनाने के लिए जाना जाता है. 1939 में महात्मा गांधी को लिखे एक पत्र में, सिंह ने गांधीजी को जिन्ना के बारे में सचेत किया था और उन्हें ‘सांप’ करार दिया था, और गांधीजी से जिन्ना पर भरोसा न करने के लिए कहा था.
जापान में की थी भारत के कार्यकारी बोर्ड की स्थापना
सिंह को दक्षिण अफ्रीका में गांधी के आंदोलन में उनकी भागीदारी, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी और देश में ब्रिटिश क्रूरताओं को उजागर करने के लिए 1932 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया था. उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1940 में जापान में भारत के कार्यकारी बोर्ड की स्थापना की थी.
1979 में हुआ था डाक टिकट जारीभारत सरकार ने उनके सम्मान में 1979 में एक डाक टिकट जारी किया था. सिंह का जन्म 1886 में हाथरस के मुरसब एस्टेट में एक जाट परिवार में हुआ था. वह राजा घनश्याम सिंह के तीसरे पुत्र थे. सिंह जाट आइकन थे.

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